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शुक्रवार, 5 जून 2009

सोती हुई बिटिया को देखकर


(मित्रों के आदेश पर लगा दी बिटिया की तस्वीर। नाम है वेरा और संगीत की दीवानी)


अभी-अभी
हुलसकर सोई हैं
इन साँसों में स्वरलहरियां



अभी-अभी
इन होठों में खिली है
एक ताज़ा कविता




अभी-अभी
उगा है इन आंखों में
नीला चाँद



अभी-अभी
मिला है
मेरी उम्मीदों को
एक मज़बूत दरख़्त

26 comments:

varsha ने कहा…

abhi abhi chua ek taja hawa ne aakar

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

जीवन के बीज बोती है आपकी कविता।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

सुंदर कविता। उम्मीद कायम रहे।

डॉ .अनुराग ने कहा…

खूबसूरत...नन्ही का फोटो भी लगाना था .....

neera ने कहा…

एक और खूबसूरत अभिव्यक्ति! आखों में ज्योत की तरह!

रवीन्द्र रंजन ने कहा…

बहुत प्यारी कविता।

अनिल कान्त : ने कहा…

bahut bahut pyari kavita
waah

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

bahut achhee abhivyakti....

bhawna ने कहा…

apni bitiya ki koi tasveer bhi to lagaiye , vaise abhi abhi dua nikli hai dil se, nanhi bitiya jaage purvaai banke :)

Rachna Singh ने कहा…

kavita aur sheershak dono mae koi bhi taal mail nahin haen par kavita apne aap mae bahut sunder haen

विवेक ने कहा…

उम्मीदों का दरख्त...सशक्त...दिल छू लेने वाली कविता

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत सुंदर कविता.

bisani ने कहा…

"vera" sabd ke arth..uss kahaanee ka patr,bitiyaa ..alok strivastvaa ,aapki abhivyakti..kraanti..sabko ek sutr mein bandhte hue ..dekhtaa hun..

khubsurat..!

बोधिसत्व ने कहा…

मन को छूनेवाला कहन....आहा..

रंगनाथ सिंह ने कहा…

मार्मिक कविता है। वेरा का अर्थ क्या होता है। इसी नाम से मिलती जुलती रसूल हम्जातोव (संभवतः)की कविता याद आ रही है।

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

रंगनाथ जी
वेरा का अर्थ प्यार और सहानूभूति है।
इस नाम कि किताब तो नहीं पर वेरा निकोलाई चेर्निशेव्यस्की की किताब स्तो जिलायेत(क्या करें) की नायिका है।

रंगनाथ सिंह ने कहा…

फैज ने हम्जातोव की उस कविता के अनुवाद किया था, जिसका शिर्षक था, वेरा/वीरा के लिए...
बोल थे,
उसने कहा आओ
उसने कहा ठहरो
मुस्काओ कहा उसने
मर जाओ कहा उसने
मैं आया,मैं ठहरा
मुस्काया और
मर भी गया

रंगनाथ सिंह ने कहा…

apke mail par maine mail bhejne ki kosis ki thi. kisi takniki vajah se mail nhi ja rha h. kripya aap ek mail mere id rangnathsingh@gmail.com par bhej de. isase aap ka mail id mere pas aa jayega aur batchit me sahuliyat ho jayegi

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

वाह
मैने इस कविता को नहीं पढा था।
आपने इसे बताकर बहुत अच्छा किया।
धन्यवाद

Kishore Choudhary ने कहा…

बहुत क्यूट है

अजित वडनेरकर ने कहा…

वाह!! बेहतरीन..

गौतम राजरिशी ने कहा…

एक बेहद ही प्यारी कविता....वेरा जैसी ही।

वेरा के लिये समस्त शुभकामनाओं सहित

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

maine us din kaha tha aapko ki aapki is kavita ko maine poore ghar me padhkar sunayi thi aur specially meri beti ko .... use bahut accha lagha..

ashok ji , is kavita ke liye main aapko "neg " doonga , jab bhi aapse milunga , ye mera waada raha aapse....

ab aur kuch nahi kahunga ...

itni sahj likha hai aapne ki main kya kahun ..

just salaam aapki lekhni ko ..

sandhyagupta ने कहा…

Jitni pyari bitiya hai utni hi pyari kavita bhi.

सुशील कुमार ने कहा…

आशा की डोर से बँधी इस कविता के लिये अशोक जी बधाई और बेटी को बहुत-बहुत हमारा प्यार।

प्रदीप कांत ने कहा…

अभी-अभी
मिला है
मेरी उम्मीदों को
एक मज़बूत दरख़्त

कविता के लिये बधाई और बेटी को प्यार।

जिन्होंने सुविधा नहीं असुविधा चुनी!

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