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बुधवार, 30 दिसंबर 2009

देखूंगा एक पूरा स्वप्न


( अरसा पहले लिखी यह कविता आज नये साल की शुभकामनाओं के साथ)

नये साल में
नये साल में
लिखूंगा एक पूरी कविता.

गाऊंगा
पूरे स्वर में कोई मुक्तिगान।

ढ़ूढ़ूंगा
कुछ पूरे दोस्त।

भले नया न हो
पर देखूंगा एक पूरा स्वप्न।

जीना चाहूंगा
एक पूरी ज़िदगी।

भटकूंगा
पूरेपन की तलाश में
पूरे साल

17 comments:

बेनामी ने कहा…

geet chaturvedi मुझे

poorepan ki ye talaash poori ho, isi shubh kaamna ke saath
happy new year.

Udan Tashtari ने कहा…

आमीन!!!



मुझसे किसी ने पूछा
तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
तुम्हें क्या मिलता है..
मैंने हंस कर कहा:
देना लेना तो व्यापार है..
जो देकर कुछ न मांगे
वो ही तो प्यार हैं.


नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

सुंदर संकल्प,नए वर्ष के लिए शुभकामनाएँ। संकल्प पूरे हों।

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

यह भट्कन भी कितनी सुन्दर होगी !

बेहतरीन कविता । आभार ।

Suman ने कहा…

nice

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

बढ़िया रचना ! नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !

ललित शर्मा ने कहा…

शानदार जानदार पोस्ट
नुतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

निर्मला कपिला ने कहा…

भले नया न हो
पर देखूंगा एक पूरा स्वप्न।

जीना चाहूंगा
एक पूरी ज़िदगी।
bahut sundar aapake sabhee sapane naye saal me poore hoM dhanyavaad aur shubhakaamanaayen

varsha ने कहा…

aapki talash mukammal ho raha sawal dost ka to ham khud kyon na kisi ke poore dost bane....

शायदा ने कहा…

भरपूर कविता।शुभकामनाएं, सारी इच्‍छाएं पूरी हों आपकी इस वर्ष।

sandhyagupta ने कहा…

भटकूंगा
पूरेपन की तलाश में
पूरे साल

Yahi hamari niyati hai.

Nav varsh ki dheron shubkamnayen.

neera ने कहा…

सरल ..भावपूर्ण ..अर्थ पूर्ण ..
बेहतरीन तोहफा नव वर्ष का

भटकूंगा
पूरेपन की तलाश में
पूरे साल

यह पूरेपन की तलाश उम्र भर पीछा नहीं छोडती..

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

नव वर्ष की शुभकामनाएं!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

बहुत आशावान चाहत छुपी हुई है - इस कविता में!

नया वर्ष हो सबको शुभ!

जाओ बीते वर्ष

नए वर्ष की नई सुबह में

महके हृदय तुम्हारा!

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

बेहतर आकांक्षाएं...

गौतम राजरिशी ने कहा…

विलंब से आने के क्षमा चाहूंगा अशोक भाई...

नये साल की आपको भी समस्त शुभकामनायें! ईश्वर करे आपकी लेखनी यूं ही हम सब को चमत्कृत करती रहे...और आप यूं ही पूरे स्वर में गाते रहें कोई मुक्तगान।

जिन्होंने सुविधा नहीं असुविधा चुनी!

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