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शनिवार, 28 मई 2011

राशिद अली की एक गजल बंगाल में 'लेफ्ट' की हार को समर्पित


कहीं रतजगों के वो बेनवा कहीं ज़ब्ते गम का हिसाब है
वो जो ख्वाब था किसी और का किसी और का ही वो ख्वाब है

वो जो लाम था किसी दौर का वो जो काफ था किसी और का
वो न लफ्ज़ में ही सिमट सका न ही जेरे शेरे सहाब है

जिन्हें नाज़ था किसी माह पे जिन्हें शर्फ़ था किसी ताब पे
किसी शब् गज़ीदा सहर तले वो तो कुहना मशकी अताब है

क्या गिरिफ्ताज़न था वो फलसफा क्या तबीब था वो मरीज़े नौ
किसी बादा चश का नसीब था या की मुफलिसी का निसाब है

वो करीब थे कई और दिन, कई और दिन वो रकीब थे
क्या नकाहतों का ये इश्क था या कनाअतों का शबाब है

किस बदमज़ा से मक़ाम पे कहीं छोड़ आया था वो चारागर
चलो हाय कुछ तो सही हुआ जो ग़लत हुआ वो सवाब है

ये जम्हूर है या या तिलिस्म है जो फंसा है धंस के फंसा रहे
कहीं खाके मुर्दा गिरास है कहीं तिशनगी का सेराब है

मुश्किल शब्दों के हिन्दी-अंग्रेजी मानी
ज़ब्ते गम -- Not expressing the pain (दर्द को प्रकट न करना)
लाम-- an alphabet of Urdu, it can also mean la of laal. (उर्दू वर्णमाला का एक शब्द- इसका मतलब लाल का ला भी हो सकता है)
काफ- an alphabet of Urdu (उर्दू वर्णमाला का एक शब्द
Together they make a phrase like laam kaaf mat kijiye which means - don't complicate. (साथ में वे एक मुहाविरा बनाते हैं - लाम काफ मत कीजिए यानि चीजों को जटिल न बनाइये )
जेरे शेरे सहाब- Under red coloured poetry.(लाल रंग की कविता के तहत)
माह - Month, moon (महीना, चाँद)
ताब- Illumination, light, brightness ( चमक, रोशनी)
शब् गज़ीदा सहर - A dawn after grieving night ( दुखद रात के बाद की सुबह)
कुहना मशकी अताब - experimentally old curse ( कोई बहुत पुराना श्राप)
गिरिफ्ताज़न- talking tall (बड़ी बातें)
तबीब- Doctor
मरीज़े नौ- Fresh patient (नया मरीज)
बादा चश - a person who drinks little. (थोड़ी सी पीने वाला)
मुफलिसी - poverty (गरीबी)
निसाब- curriculum or capital (कोर्स या पूँजी)
नकाहतों - plural of weakness ( कमजोरियां)
कनाअतों - plural of contentments (संतोष का बहुवचन)
बदमज़ा - insipid, bad taste, tasteless ( खराब स्वाद का)
चारागर- Doctor
मक़ाम- destination (मंजिल)
सवाब- fruits of good deeds (it's used in theological sense) (अच्छे कर्मों का फल, धार्मिक अर्थ में प्रयुक्त)
जम्हूर - Republic or democracy (लोकतंत्र)
तिलिस्म - Witchcraft, virtual world of a sorcerer.
खाके मुर्दा गिरास - barren land of hungry people (भूखे लोगों की बंजर बस्ती)
तिशनगी का सेराब- Mirage of thirst. (मृगतृष्णा)


7 comments:

SIRAJ FAISAL KHAN ने कहा…

बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल
सभी अशआर लाजवाब हैँ
लफ़्ज़ थोड़े मुश्किल हैँ मगर अशोक सर ने उनके अर्थ बताकर मेरे जैसे कम उर्दू जानने वालोँ पर एहसान किया है

सागर ने कहा…

कातिल ग़ज़ल, लगा ज़फर का वक़्त लौट आया हो.

Shamshad Elahee Ansari "Shams" ने कहा…

स्तरीय और शास्त्रीय रचना है, बेहद सकील भाषा और जब लूगत देखनी पडे तब मायने और उनके सिरे जोडने में सारा मज़ा किरकिरा हो जाता है. अभी इस जटिल भाषा को समझने वाले हों न हों पर फ़ख्र है कि लिखने वाले तो हैं ही, राशिद भाई को, अशोक भाई के ज़रिये बडे अदब से मेरा सलाम पहुंचे, असुविधा बनाये रखेंगे, इस तवक्को के साथ, बंगाल पर और सामग्री मिले इसी तरह पढने के लिये तो बात बन जाये. सादर

Shamshad Elahee Ansari "Shams" ने कहा…

स्तरीय और शास्त्रीय रचना है, बेहद सकील भाषा और जब लूगत देखनी पडे तब मायने और उनके सिरे जोडने में सारा मज़ा किरकिरा हो जाता है. अभी इस जटिल भाषा को समझने वाले हों न हों पर फ़ख्र है कि लिखने वाले तो हैं ही, राशिद भाई को, अशोक भाई के ज़रिये बडे अदब से मेरा सलाम पहुंचे, असुविधा बनाये रखेंगे, इस तवक्को के साथ, बंगाल पर और सामग्री मिले इसी तरह पढने के लिये तो बात बन जाये. सादर

समीर यादव ने कहा…

अभी इस जटिल भाषा को समझने वाले हों न हों पर फ़ख्र है कि लिखने वाले तो हैं ही, राशिद भाई को, अशोक भाई के ज़रिये बडे अदब से मेरा सलाम पहुंचे,शमशाद इलाही साहब की बातों से सहमत होता..बस यही कहूँगा कि इस तरह की रचनाएं और रचनाकार दोनों ही हमारी धरोहर है.

inkeshaf alam ने कहा…

बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल
जो ख्वाब था किसी और का किसी और का ही वो ख्वाब है ........ सागर सर की बातों से सहमत होता..बस यही कहूँगा असुविधा बनाये रखेंगे,

Nilambuj singh ने कहा…

शायरी अच्छी है। अल्फ़ाज़ मुश्किल हैं। जैसा शम्स भाई ने कहा कि जब कोश देखना पड़ जाये तो कविता का मज़ा किरकिरा हो जाता है। सरल कहिए। सरलता से कहिए। मीर, ग़ालिब , फ़ैज़ , नासिर , साहिर आदि के उदाहरण हमारे सामने हैं कि उनके वही शेर अवाम तक पहुँचे हैं जो सरल हैं। सरल का सरलीकरण भी ठीक नहीं है। मीर ने तो कहा है -
शेर मेरे हैं गो कुछ खास-पसंद( खवास-पसंद)
पर मेरी गुफ्तगू अवाम से है

जिन्होंने सुविधा नहीं असुविधा चुनी!

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