सेंसरशिप - ईरानी कवि अली-अब्दोलरेज़ा की कविता

अमीन की पेंटिंग "अ टेल ऑफ़ टू मुस्लिम्स" गूगल से 


मेरे अलफ़ाज़ के क़त्ल-ए-आम के दौरान
उन्होंने मेरी आख़िरी पंक्ति का सर क़लम कर दिया
और लहू    सियाही की मानिंद   पड़ रहा है काग़ज़ पर
यहाँ मौत पसरी हुई है काग़ज़ पर
और ज़िन्दगी   पत्थरों से बिखेर दी गई है   अधखुली सी खिड़की की तरह
एक नई बन्दूक ने निपटा दिया है दुनिया को
और मैं  इस गलियारे के दरवाज़े से  आयातित सामानों सा
                  इस जीर्ण-शीर्ण कमरे में हूँ प्रवासी की तरह  

मैं क़लम की तरह हूँ ज़िन्दगी में माँ जैसे जर्जर काग़ज़ पर खिंची रेखाओं सा
बिल्ली के पंजे अब भी मचलते हैं
उन बिलों की ओर भागते चूहे को डराने के लिए
जिन्हें भर दिया है उन्होंने.


स्कूल में पढ़े पाठों की तलाश करते
मैं अपनी जिल के लिए अब नहीं रह गया आशिक जैक
मैं अपना नया होमवर्क कर रहा हूँ
तुम उसे काट देते हो और उस लड़की में
जो अचकचायेगी इस कविता के अंत में
एक घर बनाते हो
घाव की तरह खुले एक दरवाज़े वाला
और इस घर से बेदख़ल कमरे की तरह
मौत के किनारों के बीच  ख़ुशी ख़ुशी रहती है
एक लड़की  जो मुझे अपना बनाना चाहती थी
अपनी आवाज़ों में फेंकेगी निवाले  मुझे चिढाने के लिए
अपनी देह की मस्ज़िद से
कि मेरी आँखें घूमती रहें चकरी की तरह  मुझे फिर से एक दरवेश बनाने के लिए
कैसे ये आँखें
ये ख़ाली कोटर
दो लोगों की देह के उत्सव के बीच हैं हज़ारो-हाथ
            कैसी है यह मेरे होने की जगह जहाँ मैं और और ग़ैर होता जाता हूँ ईरान में
अब्बा     अम्मी    मेरे भाई!
मेरी हालत ज़ख़्मी होने कहीं ज़्यादा नाज़ुक है
लिखना मुझसे भी ज़्यादा बेजान है
और लन्दन    जहाँ उसकी ज़ुल्फें मौसम को रेखांकित करती हैं अब भी
किसी बहन की तरह कर रहा है इंतज़ार
कि आये मौत और पसर जाए मुझमें
कि ज़िन्दगी फिर से मार डाले मुझे

लहूलुहान है मेरा दिल उस शायर के लिए जिसके अलफ़ाज़ की क़तार होती जाती है लम्बी
उस गौरैया के लिए नहीं है जिसके पास कोई डाल और जिसने घोंट  ली है अपनी चहचहाहट
                         उस कौए की वापसी के लिए जिसके लिए नहीं बचा कोई तार
                        अपने लिए
            जा चुका जो घर से     बिज़ली की तरह
मैं एक ऐसा इंसान हूँ

            जिसने की यह मूर्खता   कवि बनने की

_______________
अबोल फ्रोशां के अंग्रेज़ी अनुवाद से 

टिप्पणियाँ

HindIndia ने कहा…
शानदार पोस्ट .... बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति .... Thanks for sharing this!! :) :)

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जीवन-संदेश प्रसारित करता कविता-संग्रह - बारिश मेरा घर है

तौलिया, अर्शिया, कानपुर

उस शहर को हत्यारों के हवाले कैसे कर दें -- हिमांशु पांड्या की कविता