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अनघ शर्मा की कहानी : एक बालिश्त चाँदनी!!

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युवा कथाकार अनघ शर्मा का पहला कहानी संकलन "धूप की मुंडेर" अभी हाल ही में राजकमल प्रकाशन से आया है. उसी संकलन से एक कहानी.  “डाल दिया रे पानी पे बिछौना,किसने किया रे ये पानी पे बिछौना ससुर हमारे चौधरी,सास बड़ी तेताल,हाय- हाय- हाय दिन रात लड़े है डाल दिया रे पानी पे बिछौना,किसने किया रे ये पानी पे बिछौना” वो गाती जा रही थी और बरसते पानी को देख रही थी| कितने दिनों से लगातार बरसात हो रही थी।फ़रवरी की ऐसी उतार उसनेने आज तक नहीं देखी थी , न ही उसे ऐसा मौसम याद है कि जब फ़रवरी में कभी इतनी बरसात हुई हो। पानी की पतली पतली लकीरें छत से फूट कर दीवार पर बह निकली थीं। उसने तीसरी बार गद्दा खिसकाया कि कहीं भीग न जाये। हवा में इतनी नमी थी फिर भी उसकी इन्द्रियां तपिश महसूस कर रहीं थी। अंधेरे आकाश में धुएं की एक रेखा सच में थी या उसकी आंखें ऐसे ही देख रहीं थी ये बात वो समझ नहीं प ाई। वो सारा दिन कमरे के अंदर थी बाहर निकली ही नहीं , फिर ये कमरे के भीतर उसकी आंखें क्या देख रहीं थीं।छत आकाश सरीख़ी हो गयी है उसकी कल्पनाओं में और दीवार पर पानी की लकीरें धुएं का प्रतीक।हवा में बर...