कुलदीप कुमार की कविताएँ
कुलदीप कुमार एक इतिहास मर्मज्ञ पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं और संगीत में उनकी गहरी रुचि से ख़ासतौर पर अंग्रेज़ी अख़बारों के पाठक बख़ूबी परिचित हैं. लेकिन यह कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने शुरुआत एक कवि के रूप में की थी और सत्तर के दशक में प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ प्रकाशित हुई थीं. लम्बे अंतराल के बाद 'नया ज्ञानोदय' के ताज़ा अंक में आई इन कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि इस वक्फे में उन्होंने शायद छपना छोड़ा था लिखना नहीं. किताबें छपवाने के मामले में बेहद आलसी कुलदीप अगर अपना आलस्य त्यागते तो हमें राजनीति और संगीत पर कुछ बेहतर किताबें ही नहीं बल्कि कविताओं का भी एक शानदार संकलन पढने को मिलता. इस आग्रह के साथ नया ज्ञानोदय से ये कविताएँ साभार प्रस्तुत हैं. शोकसभा उस पूरे कमरे में शोक ही शोक फैला था लगता था फर्श पर आंसुओं की बाढ़ अभी-अभी आकर गयी है सभी शोक प्रकट कर रहे थे जो गया उसके लिए नहीं जो रह गया उसके लिए जाना वह जो चला गया ...