संदेश

कबीर लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संघर्ष, जिजीविषा, अदम्य विश्वास और सृजन के प्रतीक कबीर - रोहिणी अग्रवाल

चित्र
डॉ. रोहिणी अग्रवाल       '' मो को कहां ढूंढे रे बंदे ,   मैं तो तेरे पास में।         ना तीरथ में ,   ना मूरत में ,   ना एकांत निवास में।         ना मंदिर में ना मस्जिद में ,   ना काबे कैलास में।           मैं तो तेरे पास में बंदे ,   मैं तो तेरे पास में।         ना मैं जप में ,   ना मैं तप में ,   ना मैं बरत उपास में।         ना मैं किरिया करम में रहता ,   नाहिं जोग संन्यास में।         नहिं प्राण में ,   नहिं पिंड में ,   ना ब्राह्मांड आकाश में।         खोजा होय तुरत मिल जाऊं ,   इक पल की तलास में।         कहत कबीर सुनो भई साधो ,   मैं तो हूं विश्वास में। ''         कबीर के वैचारिक दर्शन पर पर...