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ऐनी सेक्सटन की कविताएँ : अनुवाद - अनुराधा अनन्या

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पिछली सदी के आरम्भ में अमेरिका में के समृद्ध व्यापारिक घर जन्मीं ऐनी सैक्सटन , एक असाधारण कवयित्री हैं। उनकी कविताओं को   confessional verse, स्टाइल की कविता कहा गया जिसमें उनके निजी और सामजिक  जीवन की त्रासदी साफ़ तौर पर दिखाई देती है. हालाँकि उनकी कविताएँ निजी से बाहर निकलकर अपने समय की सामाजिक-राजनैतिक विसंगतियों और हिंसाओं को कविता में बखूबी दर्ज़ किया है. एक तनावपूर्ण बचपन और संघर्षशील तरुणाई के बाद अवसाद का शिकार हो उन्होंने केवल 46 वर्ष की उम्र में आत्महत्या कर ली थी.  आज उनकी कुछ कविताओं के अनुवाद अनुराधा अनन्या द्वारा  गृहणी कुछ औरतें घरों से ब्याही जाती हैं ये एक अलग तरह की चमड़ी के होते हैं इनके पास एक दिल है , एक मुँह , एक जिगर और गूदा भी। दीवारें स्थायी और गुलाबी होती है। देखों , कैसे ये (औरतें) पूरे दिन अपने घुटनों पर बैठती हैं ,  शिद्दत से खुद को धोती रहती हैं।   आदमीं रौब से घुसते हैं ,  और जोनाह की तरह शान से वापस आते हैं अपनी मांसल माताओं में।   एक औरत उनकी(औरतों) की मां है...

निकोनार पार्रा की कविताएँ - अनुवाद : उज्जवल भट्टाचार्य

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“ कविता मुझे हमेशा वेदिका से पादरी की आवाज़ जैसी लगती थी...पंछियों को गाने दो ” – निकानोर पार्रा   ने कभी कविता के बारे में ये शब्द कहे थे. पार्रा का मानना था कि राजनीतिक व भावनात्मक शैली के बदले कविता में बोलचाल की भाषा , व्यंग्य और विसंगति होनी चाहिए. पार्रा जब चिली के कविता जगत में उभरे तो नेरुदा वहाँ छाये हुए थे. दोनों में गहरी मित्रता थी , दोनों कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हुए थे. लेकिन कविता की शैली के मामले में उनके चयन अलग-अलग थे. पार्रा ने नेरुदा के समानान्तर या विपरीत एक शैली विकसित की ,  जिसे उन्होंने  anti-poem  कहा. अपनी धारणा को उन्होंने  1954  में अपने कविता संग्रह   Poemas y Antipoemas  में प्रस्तुत किया था.   नेरुदा व पार्रा एक-दूसरे की कविता बेहद पसंद करते थे. नेरुदा ने कविता के मंच पर पार्रा के आने का स्वागत किया था. नेरुदा जब अकादमी के सदस्य बने तो उनके लिये स्वागत भाषण में पार्रा ने कहा था : “नेरुदा के काव्य को नकारने के दो तरीके हो सकते हैं. उन्हें न पढ़ना और कुटिल इरादे के साथ उन्हें पढ़ना. मैंने दोनों कोशिशें ...