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चार्ल्स ब्युकोवस्की की एक कविता

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चार्ल्स ब्युकोवस्की भीड़ की महारत छल, हिंसा और व्यर्थता से इतना भरा होता है एक औसत आदमी कि पर्याप्त वह किसी सेना के एक दिन के लिये और सबसे काबिल हत्यारे हैं वे जो हत्या के ख़िलाफ़ प्रवचन देते हैं और सबसे अधिक घृणा करते हैं वे जो प्रेम की शिक्षायें देते है और अंततः सबसे अधिक जंगख़ोर हैं वे जो शांति के उपदेश देते हैं जो हरिकथा सुनाते हैं उन्हें ज़रूरत है भगवान की जो शांति के उपदेश देते हैं नहीं है उनके पास शांति जो प्रेम की शिक्षा देते हैं नहीं है उनके पास प्रेम उपदेशकों से सावधान रहो सावधान रहो विद्वानों से उनसे सावधान रहो जो हमेशा ही पढ़ते रहते हैं किताबें उनसे सावधान रहो जो ग़रीबी से घृणा करते हैं या कि जिन्हें गर्व है इस पर उनसे सावधान रहो जो प्रशंसा करने में नहीं लगाते देर कि बदले में चाहिये होती है उन्हें प्रशंसा सावधान रहो उनसे जो तुरत लगाते हैं सेंसर कि वे डरते हैं उससे जो वे नहीं जानते सावधान रहो उनसे जो हर वक़्त ढ़ूंढ़ते हैं भीड़ कि अकेले कुछ भी नहीं वे औसत आदमी से सावधान रहो, औसत औरत से और सावधान रहो उनके प्यार से ...