सीरिया से कविताएँ - मराम अल-मासरी
सीरिया विश्व मानचित्र पर एक घाव सा है या बेहतर होगा यह कहना कि सीरिया मनुष्यता की देह पर एक घाव सा है. मराम अल-मासरी की कविताएँ उन घावों और खरोंचों को उनकी पूरी तल्खी के साथ अपनी कविताओं में ले आती हैं तो देवेश ने अपने अनुवादों से उन्हें हिन्दी के पाठक तक लाते हुए कहीं किसी असर को कम नहीं होने दिया है. देवेश के ये अनुवाद दख़ल द्वारा प्रकाशित मराम की प्रतिनिधि कविताओं के संकलन "मांस , प्रेम और स्वप्न" से लिए गए हैं. किताब अमेज़न पर उपलब्ध है. यहाँ क्लिक करें मंगाने के लिए एक अरब माँ का अपने बेटे को पत्र क्योंकि, जो अब और नहीं सह सकते आज़ादी उनके सीने के भीतर हृदय के तारों का विस्फोट है क्योंकि, यह बहादुर नाविकों के लिए मत्स्यकन्याओं का गाया गीत है क्योंकि आज़ादी सबसे ख़ूबसूरत है देवी है बुद्धिमानों की साहसियों का प्यार है मैं उसके प्रेम में पड़ गयी हूँ क्योंकि स्वर्ग है यह अग्नि का जो भभक उठती है एक हड़ताल से ठीक उसी तरह जैसे कविता शुरू होती है एक शब्द से ठीक उसी तरह जैसे प्रेम दमक उठता है एक चुम्...