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बोलेरो क्लास - असहज वक्त की जीवंत कहानियाँ

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इस बार से हम समीक्षा का एक नया कालम शुरू कर रहे हैं. कोशिश होगी कि एक सोमवार को असुविधा पर कविताएँ हों तो दूसरे पर समीक्षा, यानि अब योजना इसे कविता और समीक्षा के ब्लॉग में बदलने की है. तो आप मित्रों से गुजारिश भी कि अगर आप किसी किताब की समीक्षा कर रहे हों तो उसे हमें उपलब्ध कराइए, किसी ने आपकी किताब की समीक्षा की हो तो भी बेहिचक भेजिए. प्रिंट और ब्लॉग को मैंने हमेशा दो अलग माध्यम माना है तो प्रकाशित/अप्रकाशित पर बहुत जोर कभी नहीं रहा. मेरी कोशिश किसी शुचिता या विशिष्टता को बनाए रखने या स्थापित करने की जगह एक नए पाठक वर्ग को हिन्दी की नई-पुरानी ज़रूरी किताबों से परिचित कराने की है. इस क्रम में महत्वपूर्ण रचनाकारों के कृतित्व पर आलोचनात्मक आलेखों का भी स्वागत है. इस कड़ी में सबसे पहले जाने-माने युवा कथाकार प्रभात रंजन के प्रतिलिपि बुक्स से प्रकाशित कहानी संकलन की संज्ञा उपाध्याय द्वारा की गयी समीक्षा.   अब यह किताब आप प्रतिलिपि बुक्स की विशेष योजना के तहत उनसे सीधे मंगा कर पचास प्रतिशत की छूट प्राप्त सकते हैं. यह समीक्षा कथन में प्रकाशित हुई थी और अब उनकी स्वीकृति से यहा...