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अस्त्राखान की हिंदी सराय वाया पुरुषोत्तम अग्रवाल

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        सौरभ बाजपेयी  " हिंदी सराय :   अस्त्राखान वाया येरेवान   " नाम अपने आप में ही एक द्वैध छुपाये है। हिंदी सराय एक जाना पहचाना सा नाम लगता है। हिंदी यानि हिंदुस्तानी और सराय   वो जगह जहाँ लोगों के रुकने - ठहरने का इंतजाम हो। हमने अपने घरों में मेहमानों की आमद से ऊबे घर वालों को अक्सर कहते सुना था - घर न हो गया सराय हो गयी , लेकिन ये अस्त्राखान   और येरेवान भला किस बला   का नाम है ? दरअसल , यही वो द्वैध है जो बिना एक भी पन्ना पलटे   यह अहसास दिलाता है कि   जरूर ये किन्ही दो अनजानों का नाता है। कोई ऐसा अंतर्संबंध जो भाषाई परिवेश में एकदम भिन्न होते हुए भी एक ही राह गुजरता है - अस्त्राखान से येरेवान वाया हिंदी सराय।   इस अंतर्संबंध की खोज अपने आप में बहुत दिलचस्प है।   येरेवान , आर्मेनिया की   राजधानी और देश का सबसे   बड़ा शहर। दुनिया के कुछ सबसे पुराने ...