राजेश जोशी की कवितायें
राजेश जोशी हमारे समय के बेहद ज़रूरी कवि हैं. विचारधारा के क्षय के इस दौर में पिछले चार दशकों से वह जिस ज़िद और जिस उत्साह के साथ कविता को परिवर्तन के हथियार की तरह बरतने की कोशिश कागज़ से सड़क तक करते रहे हैं, वह मुझ जैसे युवा कलमकारों के लिए एक प्रेरणा की तरह काम करता है. ज़ाहिर है कि वे लोग जिन्होंने विचारधारा को प्रगति की सीढियों की तरह उपयोग करने के बाद अब उससे पीछा छुडाना चाहते हैं, उन्हें उनकी कविता असुविधा की तरह लगती है, चुभने वाली, तीखी. खुद को स्थापित करने की शर्मनाक कोशिश में लगे लोगों को कभी नहीं समझ आएगा कि "डायरी लिखना एक कवि के लिये सबसे मुश्किल काम है". खैर, पाठकों के बीच राजेश जोशी की स्वीकृति और सम्मान असंदिग्ध है. हमारे अनुरोध पर उन्होंने अभी हाल में 'पक्षधर' तथा 'पहल' में प्रकाशित कवितायें असुविधा के लिए उपलब्ध कराई हैं. यह समय यह मूर्तियों को सिराये जाने का समय है । मूर्तियाँ सिराई जा रही हैं । दिमाग़ में सिर्फ़ एक सन्नाटा है मस्तिष्क में कोई विचार नहीं मन में कोई भाव नहीं काले जल में बस मूर्ति का मुकुट धीरे धीरे ...