कुली लाइंस से एक अंश : यह जहाज जगन्नाथ के मंदिर की तरह है
हाल ही में वाणी प्रकाशन से आई प्रवीण झा की किताब " कुली लाइंस " ख़ूब चर्चा में है. गिरमिटिया मज़दूरों के जीवन और इतिहास पर आधारित इस किताब में प्रवीण का ज़बरदस्त रीसर्च दिखता है. इधर हिंदी में जिस तरह नॉन फिक्शन किताबों की मांग बढ़ी है वह भाषा के लिए शुभ है. पढ़िए इसी से एक रोचक अंश अमेज़न पर उपलब्ध हर गिरमिटिया जब जहाज़ पर चढ़ता तो उसके गले में कैदियों की तरह एक नंबर - प्लेट टंगा होता , जिसे ‘ टिन - टिकट ’ कहा जाता। यह पूरे सफर में गले पर लटका रहेगा। यही नंबर उनकी पहचान होगी। जहाज पर चढ़ने के समय कई अलग - अलग भाव होते। कुछ उदास होते , कुछ भावहीन होते और कुछ प्रसन्न। कई लोग अंतिम समय में भी भागने के रास्ते ढूँढते , पर यहाँ महिलाओं का व्यवहार गौरतलब है। महिलाएँ संभवत : भारत में भी त्रस्त थीं या यूं कहिए स्वतंत्र नहीं थीं। यह जहाज इनको नयी उड़ान देने वाला था। फिर भी , देश छोड़ने का दर्द तो था ही। एक बीमार महिला जहाज पर चढ़ने से पहले मना करती है कि वह ...