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इस्लाम का इतिहास

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नॉटनल डॉट कॉम (notnul.com) एक तरह का नवोन्मेष है जहाँ इसके कर्ता-धर्ता नीलाभ श्रीवास्तव हिन्दी की महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं के साथ किताबें भी सॉफ्ट वर्ज़न में ला रहे हैं और बेहद कम दामों में युवा पीढ़ी को उनके मोबाइल्स और लैपटॉप पर हिन्दी का श्रेष्ठ साहित्य उपलब्ध करा रहे हैं. आज असुविधा पर वहीँ से आई एक ज़रूरी किताब जिसे आप यहाँ जाकर पढ़सकते हैं. 



किसी भी काल, समूह, सभ्यता के इतिहास का अध्ययन क्षेत्र केवल फ़ेस वैल्यू पर स्रोतों के परीक्षण और उनकी व्याख्या पर निर्भर नहीं करता बल्कि इतिहास की समझ के साथ एक ‘historical method’ का रास्ता इख़्तियार करना पड़ता है जिसमें अध्ययनकर्ता को विशेष पाबंदियों के समुच्चय के साथ अपनी विचारधारा के सीमित दख़ल-अंदाज़ी की इजाज़त होती है। कहते हैं कि गुज़रा हुआ ज़माना आता नहीं दुबारा, लेकिन ‘ज़माना’ को पुनः विभिन्न माध्यम से पेश किया जा सकता जैसे पुस्तक, चलचित्र, लेख आदि, लेकिन वास्तिवक घटनाओं के द्वारा नहीं। ज़माना या काल के प्रस्तुतीकरण में असातीरी (MYTHOLOGICAL) और MYSTIFYING तत्वों के सामवेश से बचाव के लिए अक्सर जो संरचना सामने आती है वह बनवाटी प्रतीत होती है…

नेपाली कविता : सरिता तिवारी की कविताएँ

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नेपाली युवा कवयित्री सरिता तिवारी पेशे से शिक्षक और अधिवक्ता हैं और कविताओं के अलावा वहाँ के राष्ट्रीय दैनिक कान्तिपुर के लिए नियमित कॉलम लिखती हैं. प्रलेसं से जुडी सरिता जी के नेपाली में तीन कविता संकलन आ चुके हैं और अभी उनका एक संकलन हिन्दी में अनुदित होकर "सवालों का कारखाना" नाम से प्रकाशित हुआ है. 

सरिता की कविताओं के विषयों का वैविध्य आश्वस्त करता है जहाँ भीतर-बाहर की उनकी यात्राएँ अपनी गहनता में देखी जा सकती हैं. सांस्कृतिक रूप से क़रीब होने के कारण उनकी कविताएँ हिन्दी के पाठक को अपने आसपास की ही लगेंगी. असुविधा में उनका स्वागत





अनुवाद : प्रमोद धिताल 
एक औरत की दैनिकी

सबेरे उठकर खोलना है घर का दरवाज़ा साफ़ करना है कूड़ा-करकट और धूल पोंछना है फ़र्श चमकती हुई फ़र्श देखकर मुस्कराना है गृहिणी–मुस्कान सँजोना है बैठक सँवारना है शयनकक्ष जैसेकि जीतना है ओलम्पिक का स्वर्ण पदक दौड़ना है रसोईघर के भूगोल के ऊपर सुबह भर
चाय चमेना रसोई भोजन टिफिन पानी ख़त्म होने के बाद यह सब आपाधापी जैसेकि कहीं अनन्त की उड़ान भरने की हों तैयारी निकलना है जीने के उपक्रम की दैनिक धावन मार्ग में
मानों इन्तज़ार करके बैठे हैं र…