रुचि भल्ला की कविताएं
रुचि भल्ला की कविताएं इधर लगातार सामने आई हैं। उनकी कविताओं की ख़ासियत एक मुख़तसर सी विविधता है। वह भीतर से अधिक बाहर भटकती हैं अपनी कविताओं में और अक्सर बाहर के किसी दृश्य से भीतर के तन्तु जोड़ने की कोशिश करती लगती हैं। भूगोल उनका क्षेत्र हैं तो संवेदना उनकी ताक़त। इन दोनों के बीच खींचे महीन तंतु पर चलती वह भटकती हैं और इस भटकन में अक्सर नए जीवद्रव्य ढूंढ लाती हैं। उनकी कविताओं को पढ़ते मुझे यह अक्सर लगा है कि जैसे वह अपने लिए एक भाषा की तलाश में हैं, जब वह मिलती है तो कविताओं में एक अद्भुत लय के साथ संगीत बजता है, जब नहीं तो एक खालीपन भर जाता है जो कम काव्यात्मक नहीं। असुविधा पर 'स्त्री कविता माह" के अंतर्गत सुजाता की कविताओं के बाद प्रस्तुत हैं रुचि भल्ला की ये चार कविताएं - John Collier की पेंटिंग The Confession भूरा साँप जबकि कलकत्ता कभी नहीं गई फिर भी चली जाती हूँ बेलूर मठ बेलूर मठ को मैंने देखा नहीं है छुटपन में पढ़ा था किसी किताब में जब भी लेती हूँ उसका नाम थाम लेती हूँ बचपन की उंग...