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उमा शंकर चौधरी की कवितायें

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उमाशंकर चौधरी हिन्दी की युवा पीढ़ी के बहुचर्चित और बहुपुरस्कृत कवियों में से हैं. साथ ही,वह उन कवियों में से भी हैं जिन्होंने कविता और कहानी दोनों को बड़ी कुशलता से साधा है. उनकी कविताओं में जीवन की तमाम विडंबनाओं के दृश्य अपनी पूरी डिटेल्स के साथ आते हैं. कई बार वह दोनों विधाओं में आवाजाही करते से लगते हैं. ग्रामीण और कस्बाई जीवन के साथ राजनैतिक परिदृश्य पर उनका सीधा और तीक्ष्ण व्यंग्य उन्हें एक ज़रूरी कवि बनाता है. असुविधा पर आज उनकी कुछ नई-पुरानी कवितायें आग                             वह बच्ची, जिसकी उम्र दस- बारह वर्ष के करीब है और जिसने अपनी दो कोमल उंगलियों के बीच फंसा रखे हैं पत्थर के दो चिकने टुकड़े इस भीड़ भरी बस में निकालने की करती है कोशिश अपने गले से अनुराधा पौडवाल की आवाज पत्थर के इन दो चिकने टुकड़ों से निकालती है वह ढ़ेर सारी फिल्मी धुनें, भगवान के भजन और सफर के गीत इस भीड़ भरी बस में भी लोग सुनते हैं उसके छोटे गले से अनुराध पौडवाल की छोटी आवाज और देखते हैं बहुत ही तेज ...