अनुराग अनंत की कविताएँ
अनुराग अनंत की कविताओं से मेरा परिचय नया है. इनमें लगभग वह सबकुछ है जिसकी तलाश हम एक युवतर कवि में करते हैं - ऊब, चिढ़, बहुत कुछ या कहिये सब कुछ कह जाने की जल्दबाज़ी, ज़िद, मासूमियत और एक खरा गुस्सा. अपने आस-पास के परिवेश से लेकर देश-दुनिया के तमाम हिस्सों में होने वाली उथल-पुथल तक वह भटकते दीखते हैं और इनके बीच उनके कुछ ऑब्जर्वेशन बेहद मानीखेज़ हैं. असुविधा पर उनका स्वागत और ढेरों उम्मीदें भूख और सपनों के बीच भूख के भेष में जिंदगी और जिंदगी की शक्ल में सपने चलते रहें हैं हमारे साथ और हम चलने के नाम पर ठहरे रहे हैं कहीं भूख और सपनों के बीच उजाले के भरम में अँधेरे को चुना है हर बार , बार बार और एक गीत जिसका कोई खास मतलब नहीं होता भूखे और सपनीले लोगों के लिए हमने खूब गाया है उलझन को गूंदा है , चिंता को बेला है और मजबूरी को सेंक कर खाया है आजादी के बाद देश ऐसे ही चलते आया है दर्द का दाग तिलक सा सजाकर भीतर रो कर ब...