फिल्मनामा : सोफी'ज़ च्वायस पर विजय शर्मा का आलेख
1979 में विलियम स्टाइरेन के लिखे उपन्यास पर आधारित फिल्म सोफी'ज च्वायस 1982 में बनी थी. यह फिल्म सबसे अधिक याद की जाती है मेरिल स्ट्रीप की अदाकारी के लिए, जिन्हें इस फिल्म में अपनी भूमिका के लिए अकादमी का सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार तो मिला ही, साथ ही वह हालीवुड के इतिहास की तीन सर्वश्रेष्ठ भूमिकाओं में शामिल की जाती हैं. आज पढ़िए इसी फिल्म पर विजय शर्मा का आलेख : सोफ़ीज़ च्वाइस: निर्णय का संताप सार्त्र जब कहता है कि हमारे पास चुनाव का विकल्प है तो शायद उसने कभी भी ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी जिस यंत्रणापूर्ण स्थिति से सोफ़ी को गुजरना पड़ा है। विकल्प होने के बावजूद क्या व्यक्ति चुनाव कर सकता है? और जब चुनाव के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होता है तो उस चुनाव का व्यक्ति के जीवन पर क्या असर पड़ता है? ‘ सोफ़ीज च्वाइस’ फ़िल्म का हर दृश्य अतीत में लिए गए निर्णयों से उत्पन्न यंत्रणा को, संतापपूर्ण जीवन की विडंबना को दिखाता है। सोफ़ी की वेदना को मूर्तिमान करता है। जब फ़िल्म समाप्त होती है तो दर्शक अवाक बैठा रह जाता है। बाद में भी जब वह इस फ़िल्म को याद करता है उसक...