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रुखसत हुआ तो आँख मिलाकर नहीं गया- शहजाद अहमद को एक श्रद्धांजलि

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चला गया वो सितारे खैरात करने वाला अदब का अज़ीम खिदमतगार कुलदीप अंजुम रुखसत हुआ तो आँख मिलाकर नहीं गया  वो क्यूँ गया है ये भी बताकर नहीं गया  यूँ लग रहा है जैसे अभी लौट आयेगा जाते हुए चिराग बुझाकर नहीं गया  बस इक लकीर खेंच गया दरमियान में  दीवार रास्ते में बनाकर नहीं गया  शायद वो मिल ही जाये मगर जुस्तजू है शर्त  वो अपने नक़्शे पा तो मिटाकर नहीं गया घर में हैं आजतक वही खुशबू बसी हुई  लगता है यूँ कि जैसे वो आकर नहीं गया रहने दिया न उसने किसी काम का मुझे  और खाक में भी मुझको मिलाकर नहीं गया  अगर उर्दू अदब में आपकी जरा सी भी दिलचस्पी है तो आप शहजाद अहमद के नाम से ज़रूर वाकिफ होंगे.  इस महबूब शायर का पिछले दिनों अगस्त १ २०१२ बुधबार को इंतकाल हो गया . ३१ जुलाई को दफ्तर से लौटते वक़्त उन्हें दिल का दौरा पड़ा और अगले दिन इस महान फनकार ने हमारा साथ छोड़ दिया. करीब बीस साल पहले उन्हें पहली दफे दिल का दौरा पड़ा था पर उस समय वक़्त उनके साथ था . अपने आखिरी दिन तक वो "मजलिसे तरक्की ए अदब" के ...