अस्मुरारी नंदन मिश्र की कविताएँ
अस्मुरारी नंदन मिश्र उड़ीसा के एक केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ाते हैं, खूब पढ़ते हैं और लिखते भी हैं. उनकी कविताएँ एक बेचैन युवा की कविताएँ हैं. तमाम सामाजिक-राजनीतिक विडम्बनाओं और ग़म-ए-दौरां-ग़म-ए-जानां के बीच के द्वंद्व की सहज, ईमानदार और संवेदनशील उपज. बादल-बसंत और स्वप्न पर धावा बोलती भीड़ के बीच प्यार करने की हिम्मत जुटाती लड़कियों की तरह ही वह बाज़ार और धर्म के चौतरफे हमले के बीच सच को अपने तरीके से कह पाने का साहस जुटाते हैं. असुविधा पर उनका स्वागत लड़कियां प्यार कर रही हैं खिडकियों में लगाई जा रही हैं मजबूत जालियाँ परदे को किया जा रहा है चाक-चौबंद दरवाजे को दी जा रही है सीख किस दबाव से खुलना है किससे नहीं गढ़ी जा रही हैं घर की परिभाषाएं बतलाया जा रहा है दहलीज का अर्थ ढोल पर गायी जा रही हैं तहजीबें बड़े-बड़े धर्मज्ञानी लेकर बैठ चुके हैं धर्म की किताबें पंडित - मुल्ला सभी हो गए हैं एक मत सख्त की जा रही है फतवों की भाषा कवि गा रहें हैं लाज लिपटे सौन्दर्य के गीत शान चढ़ तेज हो रही हैं नजरों की तलवारें पूरी भीड़ धावा बोल चुकी है- ...