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तुर्की कविताएँ - मुईसेर येनिया

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तुर्की  की युवा कवि मुइसेर एनिया की इन कविताओं का अनुवाद हिंदी के कवि अनुवादक मणि मोहन ने किया है. दुनिया भर की स्त्रियों की कविताएँ पढ़ते पितृसत्ता के रूह तक को प्रभावित करने वाले ज़ुल्मों के निशानात शाया होते जाते हैं. मुइसेर की कविताएँ उसी कड़ी का एक रौशन हिस्सा हैं. भीतर तक भेदने वाली नज़र और उसे कविता में ढाल देने का हुनर.  असुविधा के लिए ये कविताएँ उपलब्ध कराने के लिए  मणि मोहन भाई का आभार. मुइसेर की कविताओं का जो संकलन वह ला रहे हैं, उसके लिए उन्हें ख़ूब बधाई भी. Muiser Yenia मैं एक अजनबी हूँ ख़ासकर खुद के लिए ------------------------------ --------------------- खुद की कीमत पर , मैं एक अजनबी के साथ रहती हूँ और यदि मैं उछल पडूँ , तो वो गिर पड़ेगा मेरे भीतर से बाहर मैं अपनी गर्दन के नीचे देखती हूँ मेरे बालों की तरह हैं उसके बाल उसके हाथ मेरे हाथों की तरह मेरे हाथों की जड़ें , धरती के भीतर हैं दर्द से कराहती धरती हूँ मैं , खुद में जाने कितनी बार   अपना चकनाचूर ज़ेहन मैंने छोड़ा है पत्थर के नीचे मैं सोती हूँ ताकि वो आराम कर सके मैं जागती हूँ ताकि व...